ऊद इत्र
परंपरा: भारतीय (सनातन) · प्रमाण: क्षेत्रीय लोक-परंपरा · तरीका: इत्र (उद्देश्य से)
उद्देश्य: सुरक्षा, करियर और व्यापार
पृष्ठभूमि
कन्नौज (उ.प्र.) की देग-भपका विधि: फूल या जड़ी को ताँबे की देग में पानी के साथ भाप दी जाती है और भाप भपके में रखे चंदन तेल में समा जाती है। 'कन्नौज इत्र' को 2014 में GI टैग मिला। अरबी और भारतीय दोनों परंपराओं में; असली ऊद बहुत महँगा है।
सामग्री
- ऊद (अगर) इत्र
विधि (क़दम-दर-क़दम)
- इत्र असली (अल्कोहल-रहित, चंदन तेल आधारित) लें।
- कलाई या कान के पीछे एक बूँद, पहले पैच टेस्ट।
- संकल्प या प्रार्थना के साथ लगाएँ, चाहें तो पूजा में फूल पर एक बूँद।
- कपड़े पर लगाएँ तो दाग़ की जाँच कर लें।
कहाँ / कब: महत्त्वपूर्ण काम, आत्मबल
विकल्प: गुलाब जल या फूल
⚠ सावधानी: इत्र भी तेल है: एलर्जी हो सकती है; आँखों से दूर। बच्चों और गर्भावस्था में डॉक्टर की सलाह। बाज़ार में नकली इत्र बहुत हैं।
मिलते-जुलते उपाय
पारंपरिक मोजो पोटलीसुरक्षा मोजो पोटलीसफलता और अवसर मोजो पोटलीरोड ओपनर (रास्ता खोलने वाली) पोटलीसुरक्षा पोटलीआत्मविश्वास पोटली
पारंपरिक या प्रतीकात्मक प्रथा; कोई परिणाम गारंटीड नहीं। यह चिकित्सा, क़ानूनी या आर्थिक सलाह का विकल्प नहीं। कोई मिश्रण खाना-पीना नहीं; बच्चों और पालतू जानवरों से दूर रखें।
The Mystic Prragati