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भगवद्गीता 2.40

अध्याय 2, श्लोक 40

नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते।
स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात्।।2.40।।

nehābhikrama-nāśho ’sti pratyavāyo na vidyate
svalpam apyasya dharmasya trāyate mahato bhayāt

अर्थ: इस रास्ते में कोई कोशिश बेकार नहीं जाती, और कोई उलटा नुकसान भी नहीं होता। इस धर्म का थोड़ा-सा पालन भी बड़े डर से बचा लेता है।

Meaning: On this path no effort is wasted and no harm results. Even a little of this practice protects one from great fear.

प्रसंग: श्रीकृष्ण निष्काम कर्मयोग की महिमा बताते हैं।

जीवन से संबंध: बड़ा बदलाव छोटे क़दमों से शुरू होता है। थोड़ा भी सही प्रयास बेकार नहीं जाता।

मन में रखने का विचार: आज सिर्फ़ पाँच मिनट वह काम कीजिए जिससे आप डर रहे थे।

भाव

डर / भयप्रेरणा

मिलते-जुलते श्लोक

2.32.142.202.502.56

अध्याय 2: सांख्ययोग के सभी श्लोक

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