शनि ग्रह: मंत्र, उपाय, रत्न और महादशा
शनि नवग्रहों में से एक है। ज्योतिष में शनि को अनुशासन और देरी से पक्का फल का ग्रह और काम-धंधा, कर्म, सेवा और मेहनत का कारक माना जाता है।
शनि ग्रह की मुख्य बातें
| स्वामित्व की राशि | मकर, कुंभ |
|---|---|
| देवता | शनि देव (और श्री हनुमान जी) |
| वार | शनिवार |
| रंग | नीला, काला |
| दिशा | पश्चिम |
| रत्न | नीलम (पूरी कुंडली दिखाए बिना रत्न न पहनें) |
| रुद्राक्ष | 7 मुखी |
| बीज मंत्र | ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः |
| सरल मंत्र | ॐ शं शनैश्चराय नमः |
| जाप संख्या | 23,000 |
| जाप का समय | शनिवार, शाम को, पश्चिम की ओर मुख करके |
| माला | रुद्राक्ष या काले हकीक की माला |
| पाठ | शनि चालीसा, हनुमान चालीसा |
| दान | काले तिल, सरसों का तेल, उड़द, काला वस्त्र (शनिवार) |
शनि के सरल उपाय
- शनिवार को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीया जलाएँ; मज़दूरों और बुज़ुर्गों की मदद करें; ईमानदारी से मेहनत करें।
- लाल किताब-शैली के उपाय: कौवों और मछलियों को आहार दें; कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देखकर दान करें (छाया दान); शराब और मांस से दूर रहें।
उपाय श्रद्धा और परंपरा की बातें हैं; कोई गारंटी नहीं। सेहत या पैसे की समस्या में विशेषज्ञ की सलाह ज़रूर लें।
शनि की महादशा
मेहनत, अनुशासन, ज़िम्मेदारी और स्थायी उपलब्धि के विषय आगे आते हैं। फल देर से पर पक्का मिलता है; धैर्य रखें और जोड़ों व हड्डियों का ध्यान रखें।
शनि की महादशा 19 वर्ष की होती है। अपनी कुंडली में चल रही दशा मुफ़्त कुंडली में देखें।
शनि का वैदिक मंत्र
शनि स्तुति: ॐ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥
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